Wednesday, 20 June 2012

देश का दुश्मन है सेकूलर सम्प्रदाय – 3



सेकूलर सम्प्रदाय का एक अन्य आपत्तिजनक प्रयास यह रहता है कि बहुसंख्यक अर्थात् हिन्दू समाज का अधिक से अधिक अपमान किया जाये और अल्पसंख्यक अर्थात् मुस्लिम समाज का अधिक से अधिक तुष्टीकरण किया जाये, ताकि देश के ये दोनों समुदाय कभी मिलकर एक साथ न आयें। इसके लिए वे तमाम ऐसे कार्य करते हैं, जिनसे या तो हिन्दू समाज में क्षोभ की लहर फैल जाये या मुस्लिम समाज में असन्तोष पैदा हो जाए। इसके लिए वे समय-समय पर दोनों समुदायों को उकसाते रहते हैं या उकसाने वाली हरकतें करते रहते हैं। 




अगर कोई व्यक्ति या संगठन इन दोनों समाजों में परस्पर सद्भावना बनाने का प्रयास भी करता है, तो उस प्रयास को पलीता लगाने के लिए सेकूलर सम्प्रदाय के लोग एक दम सक्रिय हो जाते हैं। वे यह जानते हैं कि यदि देश के ये दो प्रमुख समुदाय एक साथ आ गये और इनमें परस्पर सद्भाव पैदा हो गया, तो उनकी सेकूलर दुकान एक दम ठप्प ही हो जाएगी और सेकूलरटी के नाम पर उनको मिलने वाली मलाई रुक जाएगी। कभी गोहत्या करके तो कभी किसी कब्र या मजार के बहाने, कभी उर्दू तो कभी आरक्षण के नाम पर ये दोनों समुदायों को लड़ाते रहते हैं और अपना उल्लू सीधा करते रहते हैं।
इतना ही नहीं वे इस्लामी आतंकवादियों को महिमामंडित भी करसेकूलर सम्प्रदाय का एक अन्य आपत्तिजनक प्रयास यह रहता है कि बहुसंख्यक अर्थात् हिन्दू समाज का अधिक से अधिक अपमान किया जाये और अल्पसंख्यक अर्थात् मुस्लिम समाज का अधिक से अधिक तुष्टीकरण किया जाये, ताकि देश के ये दोनों समुदाय कभी मिलकर एक साथ न आयें। इसके लिए वे तमाम ऐसे कार्य करते हैं, जिनसे या तो हिन्दू समाज में क्षोभ की लहर फैल जाये या मुस्लिम समाज में असन्तोष पैदा हो जाए। इसके लिए वे समय-समय पर दोनों समुदायों को उकसाते रहते हैं या उकसाने वाली हरकतें करते रहते हैं।
अगर कोई व्यक्ति या संगठन इन दोनों समाजों में परस्पर सद्भावना बनाने का प्रयास भी करता है, तो उस प्रयास को पलीता लगाने के लिए सेकूलर सम्प्रदाय के लोग एक दम सक्रिय हो जाते हैं। वे यह जानते हैं कि यदि देश के ये दो प्रमुख समुदाय एक साथ आ गये और इनमें परस्पर सद्भाव पैदा हो गया, तो उनकी सेकूलर दुकान एक दम ठप्प ही हो जाएगी और सेकूलरटी के नाम पर उनको मिलने वाली मलाई रुक जाएगी। कभी गोहत्या करके तो कभी किसी कब्र या मजार के बहाने, कभी उर्दू तो कभी आरक्षण के नाम पर ये दोनों समुदायों को लड़ाते रहते हैं और अपना उल्लू सीधा करते रहते हैं।
इतना ही नहीं वे इस्लामी आतंकवादियों को महिमामंडित भी करते हैं और उनको मासूम साबित करने की कोशिश करते हैं। इससे आतंकवाद से पीड़ित समाज क्षुब्ध होता है। अपनी करतूतों से धीरे-धीरे वे दोनों समुदायों के बीच की खाई को इतना चैड़ा कर देते हैं कि किसी दिन मामूली बात पर गुबार फूट पड़ता है और दंगा हो जाता है। उदाहरण के लिए, अभी हाल ही में कोसीकलां में मामूली बात पर दंगा हो गया। केवल हाथ धोने पर बर्तनों पर कुछ छींटे पड़ जाने पर ही दोनों समुदाय एक दूसरे के खून के प्यासे बनकर सड़कों पर आ गये। कई जानें गयीं और दर्जनों लोग घायल हुए। इस तरह के उदाहरण बिरले नहीं बल्कि आम हैं। प्रत्येक दंगे के मूल में एक मामूली बात ही होती है, जिसके बहाने लम्बे समय से दबे हुए गुबार फूट जाते हैं।
इन दंगों में सेकूलर सम्प्रदाय के लोग सीधे भले ही भाग न लेते हों, परन्तु भूमिका उन्हीं की बनायी हुई होती है। जिन दिनों दंगे नहीं होते, उन दिनों वे ऐसी हरकतें करते रहते हैं कि दंगों का आधार तैयार हो जाये और किसी दिन उपद्रव फूट पड़े। इस प्रकार सेकूलर सम्प्रदाय को ”शान्तिकाल के दंगाई“ कहा जा सकता है। ये दंगाई चाहते ही नहीं कि इस देश में सभी समुदाय शान्तिपूर्वक रहें। इसीलिए मैं इनको देश के दुश्मन कहता हूँ।
दुःख की बात तो यह है कि देश का अधिकांश मुस्लिम समाज इन तत्वों की बातों में आ जाता है। वे हिन्दू समाज का अपमान होने पर खुश होते हैं और यह नहीं सोचते कि बहुसंख्यक समाज का अपमान करने पर प्रसन्न होने वाला अल्पसंख्यक समाज कभी उनकी सद्भावना नहीं जीत सकता। एक बार संघ की अ.भा. कार्यकारिणी ने एक प्रस्ताव पास करके कहा था कि अल्पसंख्यक समाज की सुरक्षा बहुसंख्यक समाज के साथ उसकी सद्भावना पर ही निर्भर है। यह एक ध्रुव सत्य है। परन्तु सेकूलर सम्प्रदाय के लोगों ने इस पर सबसे अधिक हायतौबा मचाई थी और इसे मुस्लिम समुदाय के सामने इस प्रकार प्रस्तुत किया था, मानो संघ ने उनको धमकाया हो।
निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि जब तक देश का अल्पसंख्यक समुदाय उनको भड़काकर अपना उल्लू सीधा करने वाले सेकूलर सम्प्रदाय से बचकर नहीं रहेगा, तब तक इस देश का पूर्ण विकास नहीं होगा और देश साम्प्रदायिकता की समस्या से पीड़ित बना रहेगा। ते हैं और उनको मासूम साबित करने की कोशिश करते हैं। इससे आतंकवाद से पीड़ित समाज क्षुब्ध होता है। अपनी करतूतों से धीरे-धीरे वे दोनों समुदायों के बीच की खाई को इतना चैड़ा कर देते हैं कि किसी दिन मामूली बात पर गुबार फूट पड़ता है और दंगा हो जाता है। उदाहरण के लिए, अभी हाल ही में कोसीकलां में मामूली बात पर दंगा हो गया। केवल हाथ धोने पर बर्तनों पर कुछ छींटे पड़ जाने पर ही दोनों समुदाय एक दूसरे के खून के प्यासे बनकर सड़कों पर आ गये। कई जानें गयीं और दर्जनों लोग घायल हुए। इस तरह के उदाहरण बिरले नहीं बल्कि आम हैं। प्रत्येक दंगे के मूल में एक मामूली बात ही होती है, जिसके बहाने लम्बे समय से दबे हुए गुबार फूट जाते हैं।
इन दंगों में सेकूलर सम्प्रदाय के लोग सीधे भले ही भाग न लेते हों, परन्तु भूमिका उन्हीं की बनायी हुई होती है। जिन दिनों दंगे नहीं होते, उन दिनों वे ऐसी हरकतें करते रहते हैं कि दंगों का आधार तैयार हो जाये और किसी दिन उपद्रव फूट पड़े। इस प्रकार सेकूलर सम्प्रदाय को ”शान्तिकाल के दंगाई“ कहा जा सकता है। ये दंगाई चाहते ही नहीं कि इस देश में सभी समुदाय शान्तिपूर्वक रहें। इसीलिए मैं इनको देश के दुश्मन कहता हूँ।
दुःख की बात तो यह है कि देश का अधिकांश मुस्लिम समाज इन तत्वों की बातों में आ जाता है। वे हिन्दू समाज का अपमान होने पर खुश होते हैं और यह नहीं सोचते कि बहुसंख्यक समाज का अपमान करने पर प्रसन्न होने वाला अल्पसंख्यक समाज कभी उनकी सद्भावना नहीं जीत सकता। एक बार संघ की अ.भा. कार्यकारिणी ने एक प्रस्ताव पास करके कहा था कि अल्पसंख्यक समाज की सुरक्षा बहुसंख्यक समाज के साथ उसकी सद्भावना पर ही निर्भर है। यह एक ध्रुव सत्य है। परन्तु सेकूलर सम्प्रदाय के लोगों ने इस पर सबसे अधिक हायतौबा मचाई थी और इसे मुस्लिम समुदाय के सामने इस प्रकार प्रस्तुत किया था, मानो संघ ने उनको धमकाया हो।
निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि जब तक देश का अल्पसंख्यक समुदाय उनको भड़काकर अपना उल्लू सीधा करने वाले सेकूलर सम्प्रदाय से बचकर नहीं रहेगा, तब तक इस देश का पूर्ण विकास नहीं होगा और देश साम्प्रदायिकता की समस्या से पीड़ित बना रहेगा।

देश का दुश्मन है सेकूलर सम्प्रदाय -2


4. गोधरा का हत्याकांड सेकूलर सम्प्रदाय के दोमुँहेपन का सबसे जीवन्त उदाहरण है। अयोध्या से लौट रहे निर्दोष रामभक्तों, जिनमें महिलायें और बच्चे भी शामिल थे, को गोधरा के निकट रेलगाड़ी रोककर मुसलमानों की भीड़ ने पेट्रोल डालकर जिन्दा जला दिया था और डिब्बे के दरवाजों को सब ओर से बन्द कर दिया था, ताकि वे निकलकर भाग न सकें। इस लोमहर्षक हत्याकांड में 58 स्त्री-पुरुष-बच्चे जीवित जला दिये गये थे। सेकूलर सम्प्रदाय के लोगों ने इस हत्याकांड की कभी निन्दा नहीं की, बल्कि उसे अयोध्या के बाबरी ढाँचे के गिराने की प्रतिक्रिया बताकर उचित साबित करने की कोशिश की। इतना ही नहीं, कुछ महासेकूलर तो इस सुनियोजित हत्याकांड को मात्र दुर्घटना बताकर हत्यारों को बचाने का प्रयास भी कर रहे थे। इस मूर्खता का जो परिणाम होना था, वही हुआ। जब प्रतिक्रिया में गुजरात में हिन्दू समुदाय के उत्साही तत्वों ने मुसलमानों को मारा और जमकर हिन्दू-मुस्लिम दंगे हुए, तो वे ही सेकूलर कुबुद्धिजीवी इन दंगों की भत्र्सना में दिन-रात एक करने लगे, जिनके मुँह से गोधरा हत्याकांड की निन्दा में एक शब्द भी नहीं निकला था। ये बुद्धि राक्षस इतने निर्लज्ज हैं कि आज भी गुजरात दंगों की बात करते समय गोधरा के सामूहिक हत्याकांड को भूल जाते हैं, जैसे वहाँ कुछ हुआ ही नहीं हो। मेरा यह स्पष्ट मत है कि गोधरा के हत्यारे केवल वे नहीं थे, जिन्होंने रेलगाड़ी रोकी, पेट्रोल डाला और आग लगायी, बल्कि उनमें वे भी शामिल माने जाने चाहिए, जिन्होंने इस हत्याकांड को उचित ठहराने और अपराधियों को बचाने की कोशिश की। यदि उन हत्यारों के पीछे सेकूलर सम्प्रदाय का मुखर समर्थन न होता, तो क्या उनकी हिम्मत हो सकती थी कि इस तरह सरेआम पेट्रोल डालकर रेलगाड़ी के डिब्बे में भरे हुए रामभक्तों को जिन्दा जला देते? उन प्रत्यक्ष हत्यारों को तो अदालत से सजा मिली और मिल रही है, लेकिन इन अप्रत्यक्ष हत्यारों को आज तक कोई सजा नहीं मिली, यह हमारे कानून की बड़ी खामी है। 

5. जब एक चित्रकार एम.एफ. हुसैन ने अपनी गलीज मानसिकता के कारण हिन्दुओं की आराध्य देवियों लक्ष्मी, सरस्वती, दुर्गा आदि के नग्न और अपमानजनक चित्र बनाये, तो सेकूलर सम्प्रदाय के लोग उसकी इस नीच हरकत को कला और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर सही ठहराने लगे। उनके पास इस बात का जबाब नहीं था कि कलाकारी केवल हिन्दुओं के देवी-देवताओं को अपमानित करने से ही हो सकती है? क्यों नहीं उस चित्रकार की दुम ने मुसलमानों की पूज्य नारियों फातिमा या आयेशा अथवा ईसाइयों की कुमारी मरियम या मेरी के नग्न चित्र बनाये? क्या हिन्दू समाज को अपमानित करने में ही उसकी कला की सार्थकता सिद्ध होती है? अगर कोई हिन्दू चित्रकार फातिमा, आयेशा या मरियम के ऐसे ही नग्न और अपमानजनक चित्र बना दे, तो क्या तब भी वे कला के नाम पर उसकी प्रशंसा करेंगे? ऐसे अनेक सवाल हैं जिनके जबाब सेकूलर सम्प्रदाय के बुद्धिराक्षसों के पास नहीं हैं। देखा तो यह गया है कि मुहम्मद का मात्र एक कार्टून बनाने पर सारा सेकूलर सम्प्रदाय डेनमार्क के उस कार्टूनिस्ट की भत्र्सना में बढ़-चढ़कर भाग लेने लगा और मुस्लिम कठमुल्लों के स्वर में स्वर मिलाने लगा। क्या इस दोगलेपन की कोई सीमा है?

6. इसी से मिलता-जुलता मामला सलमान रुशदी और तस्लीमा नसरीन का है। रुशदी ने कुरान की कुछ आयतों को आधार बनाकर एक उपन्यास लिखा है, जिसमें इस्लाम की कमियों को उजागर किया गया है। उनके इस कार्य को इस्लाम का अपमान मानकर पूरी दुनिया के मुसलमान उनकी जान के पीछे पड़ गये। ईरान ने उसकी हत्या के लिए इनाम तक घोषित कर दिया। पर किसी सेकूलर ने इस कठमुल्लेपन की निन्दा नहीं की। उनके लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता केवल हिन्दू धर्म को अपमानित करने के लिए होती है। तस्लीमा ने तो इस्लाम का अपमान भी नहीं किया है, बल्कि बंगलादेश के मुस्लिम समाज में व्याप्त कुरीतियों को आधार बनाकर उपन्यास लिखे हैं। लेकिन इतने पर भी सारे कठमुल्ले और उनके पिछलग्गू सेकूलर बुद्धिराक्षस तसलीमा के पीछे पड़े हुए हैं। अपने देश से निर्वासित होकर उसने भारत में शरण चाही थी, पर सेकूलर सम्प्रदाय के खुले विरोध के कारण आज तक उसे शरण नहीं मिल सकी है और वह दुनिया में मारी-मारी फिर रही है। यह है सेकूलर सम्प्रदाय की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का नग्न रूप।

देश का दुश्मन है सेकूलर सम्प्रदाय – 1



इसमें सन्देह नहीं कि भारत जैसे अनेक धर्म-सम्प्रदायों वाले देश में सभी को समान अधिकार होने चाहिए और किसी भी धर्म या सम्प्रदाय के प्रति पक्षपात या भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन देश में एक सम्प्रदाय ऐसा है, जो इस देश के बहुसंख्यकों को सभी अधिकारों से वंचित रखने और तथाकथित अल्पसंख्यकों को सभी अधिकारों से पूर्ण करने की वकालत करता है। यह सम्प्रदाय है स्वयं को सेकूलर कहने वाले कुबुद्धिजीवियों, पत्रकारों, नेताओं और मानवाधिकारवादियों का। ये यह मानते हैं कि इनको इस देश के बहुसंख्यकों की हर बात का विरोध करने का जन्मसिद्ध अधिकार है। बहुसंख्यकों अर्थात् हिन्दुओं के पक्ष में कोई बात कहना इनकी दृष्टि में साम्प्रदायिकता है और उनके विरोध में छातियाँ पीटना इनकी नजर में महान् धर्मनिरपेक्षता या सेकूलरिटी है। अपनी सोच में ये इतने कट्टर हैं कि देश के हित और अनहित की चिन्ता किये बिना अपने कठमुल्लेपन पर अड़े रहते हैं। इसलिए मैं इनको सेकूलर सम्प्रदाय कहता हूँ।
secularism
secularism

यह सेकूलर सम्प्रदाय ही देश का असली दुश्मन है। ये इस बात को महसूस नहीं करते, और यदि करते हैं तो उसकी चिन्ता नहीं करते, कि इनकी एकपक्षीय सोच और हठधर्मिता के कारण देश को कितनी हानि पहुँच रही है। वास्तव में कई बार तो ऐसा लगता है कि इनकी अधिकांश हरकतें देश को नुकसान पहुँचाने के इरादे से ही होती हैं। आज देश में साम्प्रदायिक भेदभाव, अविश्वास और घृणा की हद तक का जो वातावरण फैला हुआ है, उसको फैलाने में ये सबसे अधिक जिम्मेदार हैं। इसलिए मैं इनको देश का असली दुश्मन मानता हूँ। अपने इस निष्कर्ष की पुष्टि करने के लिए मैं एक नहीं अनेक उदाहरण दे सकता हूँ। यहाँ मैं एक-एक करके उन घटनाओं और मामलों की चर्चा करूँगा, जिनमें इस सम्प्रदाय की जहरीली और दोगली भूमिका स्पष्ट है।

1. सबसे पहले लीजिए रामजन्मभूमि का मामला। यह एक माना हुआ तथ्य है कि विदेशी हमलावर बाबर के सिपहसालार मीर बाकी ने वहाँ पर बने हुए भगवान राम के मन्दिर को तोड़कर उसी के मलबे से मस्जिदनुमा ढाँचा बनवाया था। इसको मुक्त कराने के लिए तभी से हिन्दू संघर्ष कर रहे थे और बीच-बीच में सभी मुगल बादशाहों तथा अंग्रेजों के युग में भी यह संघर्ष चलता रहा था। स्वतंत्र भारत में हिन्दू इस स्थान को वापस माँग रहे थे और इसके बदले किसी अन्य स्थान पर भव्य मस्जिद बनाकर मुसलमानों को भेंट करने को भी तैयार थे, लेकिन देश का सेकूलर सम्प्रदाय प्रारम्भ से ही हिन्दू समाज की इस माँग के खिलाफ रहा और मुसलमानों को भड़काता रहा कि यदि बाबरी मस्जिद हाथ से निकल गयी तो कयामत आ जाएगी। इसके लिए मुलायम सिंह जैसे मुस्लिम परस्त मुख्यमंत्री को निहत्थे हिन्दुओं पर गोली वर्षा करने में भी शर्म नहीं आयी और सेकूलर सम्प्रदाय ने उनकी इस नीच करतूत को भी सही ठहराया। अन्ततः जब हिन्दू समाज का धैर्य जबाब दे गया, तो हिन्दुओं ने उस अवांछनीय ढाँचे को गिरा डाला और वहाँ श्रीराम का मन्दिर बना दिया। उस मस्जिद नुमा ढाँचे सियापा करने में सेकूलर सम्प्रदाय सबसे आगे रहा। इनका दोगलापन इस बात से स्पष्ट है कि कश्मीर तथा देश के सैकड़ों स्थानों पर हजारों मन्दिरों को मुसलमानों द्वारा गिराये जाने और वहाँ जबर्दस्ती मस्जिद बनाये जाने पर उनके मुँह से निन्दा का एक शब्द भी नहीं निकला। सेकूलर सम्प्रदाय का यह दोगलापन केवल इस मामले में ही नहीं अन्य अनेक मामलों में भी बेनकाब हुआ है, जैसा कि हम आगे देखेंगे।

2. कश्मीर में अल्पसंख्यक हिन्दुओं के साथ बहुसंख्यक  मुसलमानों ने जो सलूक किया है, वह जग जाहिर है। 4 लाख से भी अधिक कश्मीरी हिन्दुओं को बहुसंख्यक मुसलमानों और उनके द्वारा पोषित-समर्थित आतंकवादियों के डर से कश्मीर छोड़कर बाहर आना पड़ा और उनमें से अधिकांश आज भी शरणार्थी शिविरों में दयनीय दशा में रह रहे हैं। लेकिन सभी जगह अल्पसंख्यकों अर्थात् मुसलमानों की तरफदारी करने वाले हमारे सेकूलर कुबुद्धिजीवियों के मुँह कश्मीरी हिन्दुओं के मामले में सुई-तागे से सिले हुए हैं। फिलस्तीन विस्थापितों तक के लिए छातियाँ पीटने वाले ये निर्लज्ज मानवाधिकारवादी कश्मीरी हिन्दू विस्थापितों के लिए एक शब्द भी नहीं बोलते और उन पर कश्मीरी इस्लामी आतंकवादियों द्वारा किये गये अमानुषिक अत्याचारों को देखकर भी आँखें बन्द कर लेते हैं। उलटे वे कश्मीरी अलगाववादी नेताओं को दिल्ली में बुला-बुलाकर उनका प्रचार करते हैं। ऐसा करते हुए उन्हें कोई शर्म महसूस नहीं होती। उनकी दृष्टि में मानवाधिकार केवल इस्लामी आतंकवादियों के होते हैं, हिन्दुओं को वे मानव नहीं मानते। मैं सेकूलर सम्प्रदायवालों से पूछना चाहता हूँ कि जैसा सलूक कश्मीर के मुस्लिम बहुसंख्यकों ने वहाँ के हिन्दू अल्पसंख्यकों के साथ किया है, यदि वैसा ही सलूक देश भर के हिन्दू बहुसंख्यक यहाँ के मुस्लिम अल्पसंख्यकों के साथ करें, तो उसको वे किस आधार पर गलत ठहरायेंगे?

3. सेकूलर सम्प्रदाय का एक और शौक है- नक्सलवादी हिंसा का समर्थन करना और नक्सलवादियों के मानवाधिकारों की पैरवी करना। बड़े-बड़े सेकूलर कुबुद्धिजीवी नक्सलवादियों की हिंसा का समर्थन यह कहकर करते हैं कि वे वंचित या आदिवासी समुदाय की लड़ाई लड़ रहे हैं, क्योंकि वहाँ पर्याप्त विकास नहीं हुआ है। परन्तु वे यह नहीं बताते कि सरकारी विकास योजनाओं को रोककर और सरकारी कर्मचारियों का अपहरण और हत्या करने से यह विकास कैसे होगा? यदि नक्सलवादियों की हिंसा उचित है, तो वे सरकारी हिंसा को गलत कैसे ठहरा सकते हैं। जब भी कोई नक्सलवादी हत्यारा नेता किसी पुलिस कार्यवाही में मारा जाता है, तो तथाकथित मानवाधिकार संगठन उसकी पैरवी में जमीन-आसमान एक कर देते हैं। लेकिन जब नक्सलवादियों द्वारा किये गये हमलों में या उनकी बारूदी सुरंगों के फटने से दर्जनों पुलिसवाले या सैनिक मारे जाते हैं, तो इनके मुँह से सांत्वना का एक शब्द भी नहीं निकलता। वास्तव में ये तथाकथित मानवाधिकारवादी अपनी करतूतों में इतना दोगलापन दिखाते हैं कि अब कोई भी इनकी बात को गंभीरता से नहीं लेता। अपनी इस दयनीय छवि के लिए यह सेकूलर सम्प्रदाय स्वयं ही जिम्मेदार है

Tuesday, 19 June 2012

कोसीकलां (मथुरा) दंगे का पूरा सच--


कोसीकलां (मथुरा) दंगे का पूरा सच--




कोसीकलां दंगे का प्रारंभ और क्रमवार विश्लेषण-
१ जून २०१२, दिन शुक्रवार, तिथि निर्जला एकादशी, समय दोपहर २ बजे मुस्लिम समुदाय के जुमे की नमाज का समय| कोसीकलां में जिंदगी अपनी गति से बढ़ रही थी| दोपहर की नमाज समाप्त होने के पश्चात् सब्जी मंडी में एक व्यापारी देवा ने एक ग्राहक को सामान दे कर मस्जिद के निचे रखे ड्रम के पानी से हाथ धो लिया| उसी समय मस्जिद से निचे उतर रहे खालिद शेख ने व्यापारी देवा को ऐसा करते देख लिया और उसे फटकार दिया| देवा ने कहा की अगर आपका पानी ख़राब हो गया तो मैं क्षमा मांगता हूँ और ड्रम को दोबारा भरवा देता हूँ| देवा ने दोबारा ड्रम को पानी से भरवा दिया| दोबारा पानी भरवा देने के बाद भी खालिद शेख अपने अहंकारवश देवा से मारपिट चालू कर दिया| खालिद के ऐसा करने का अन्य हिन्दू व्यापारी बन्धुवों ने विरोध किया| लेकिन खालिद ने मस्जिद से अन्य मुस्लिमों को बुला लिया हिन्दुओं के साथ बर्बरता पूर्वक मारपीट करता हुआ मस्जिद में वापस चला गया और उसके बाद मस्जिद में उपस्थित मुस्लिमो ने हिन्दुओं पर मस्जिद के अन्दर से ही पथराव चालू कर दिया| इतना ही नहीं खालिद ने कोसी नगर के मुस्लिम बहुल इलाके "निकासे" के मुस्लिमो को ये सुचना दे दी की हमारी मस्जिद को हिन्दुओं ने घेर लिया है और हमारे ऊपर हमला कर रहे हैं| ज्ञात हो की खालिद शेख ६ महिना भारत में रहता है और ६ महिना सउदी अरब में रहता है| वह सउदी अरब से कोसीकलां और उसके आसपास के क्षेत्रों के सभी मस्जिदों के लिए हवाला के जरिये धन मुहैया करता है| इतना ही नहीं खालिद शेख आई०एस०आई० का एजेंट भी है और मुस्लिम हितैषी सरकार जैसे कांग्रेस और सपा के साथ प्रगाढ़ सम्बन्ध बनाये हुए है और उनके हमेसा संपर्क में रहता है|


कोसीकलां का पाकिस्तान कहे जाने वाले मुस्लिम बहुल क्षेत्र "निकासे" से सैकड़ों की संख्या में उग्र मुसलमानों की भीड़ अपना आतंकवादी रूप दिखाते हुए अपने विभिन्न प्रकार के घातक हथियारों जैसे बम, पिस्तौल, पेट्रोल बम इत्यादि से लैस हो कर हिन्दुओं पर हमला करते हुए उक्त मस्जिद की तरफ बढ़ने लगे| लेकिन सब्जी मंडी मस्जिद और निकासे के बिच स्थित हिन्दू बहुल क्षेत्र "बल्देव गंज" के हिन्दू भाइयों ने निकासे के मुस्लिमो को मुहतोड़ जवाब दिया| इसपर गुस्साए मुसलमानों ने तबाही का जो मंजर प्रस्तुत किया वो दिल दहला देने वाला था|
निकासे सीमा पर स्थित पंजाब नेसनल बैंक में घुस कर मुसलमानों ने सिर्फ वहां की संपत्ति को केवल भारी नुकसान ही पहुँचाया बल्कि लूटपाट का भी प्रयास किया| इसका पूरा विवरण बैंक के सीसीटीवी कैमरे में कैद है जिसे अगर प्रदेश सरकार चाहे तो देख सकती है| लूटपाट में असफल होने के पश्चात् मुसलमानों ने बैंक को आग के हवाले कर दिया| बैंक के बाहर मुस्लिम दंगाई और बैंक के अन्दर आग| इसके बावजूद भी बैंक के अन्दर उपस्थित स्टाफ, कर्मचारियों और ग्राहकों ने इधर-उधर शरण ले कर जैसे-तैसे अपनी जान बचाई| मुसलमानों का गुस्सा और आतंकवादी गतिविधियाँ यही नहीं थमीं| मुसलमानों ने निकासे सीमा पर स्थित लगभग सभी हिन्दू घरों में घुस कर ना सिर्फ तोड़-फोड़ और लूटपाट करी बल्कि वहां मौजूद हिन्दू माताओं और बहनों से भी बड़ी ही अश्लीलता पूर्ण बद्तामिजियाँ कीं| दंगाइयों ने हिन्दुओं के घरों के निचे रखी उनकी कारों को आग के हवाले कर दिया| जिसके कारण कई हिन्दुओं के घर जल कर खाक हो गए| हिन्दुओं में बल्देव गंज और निकासे सीमा पर स्थित आर०के० गर्ग, गुड्डू हतानियाँ, किशन पंडित और प्रतिक जैन इत्यादि हिन्दू भाइयों के घर, वाहन, दुकान और गोदाम आदि की भारी हानी हुई| इनकी माता बहनों के साथ घर में घुस कर अमानवीय रूप से बदतमीजी की गई| मुस्लिम दंगाइयों ने आने-जाने वाले हिन्दू राहगीरों के करीब २ दर्जन वाहनों को आग के हवाले कर दिया और इनके साथ बड़ी बेरहमी से मारपीट कर बुरी तरह घायल कर दिया| मुस्लिम दंगाइयों की संख्या अचानक से इतनी बढ़ गई की इनका सामना करने का साहस किसी में नहीं था| यहाँ मुस्लिम दंगाई बल्देव गंज के युवाओं पर लगातार पत्थर और बम इत्यादि से हमले कर रहे थे| हिन्दुओं के पास मुसलमानों के सामान हथियार नहीं थे क्यूंकि प्रदेश सरकार ने अपने चुनाव पूर्व वादे के हिसाब से मुस्लिम बस्तियों में कैम्प लगा कर 1 दिन में ही करीब 200 पिस्तौल के लाइसेंस बांटे थे और ये पहला वादा था जो अखिलेश सिंह यादव की सपा सरकार ने पूरा किया था फिर भी उपलब्ध हथियारों से बल्देव गंज के हिन्दू युवाओं ने इन मुस्लिम आतताइयों का सामना कर इनके हमलों का मुहतोड़ जवाब दिया| मुसलमानों के आक्रोशित और आतंकी जत्थे ने पूरी सब्जी मंडी, अनाज मंडी और अनेक बाजारों इत्यादि को जला कर राख कर दिया|


इस दंगे की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन घटना स्थलों पर पहुँच तो गया पर एक निरीह मूकदर्शक बन खड़ा रहा बस| मुसलमानों के इस पथराव में कई हिन्दू भाई घायल हो गए| मुस्लमान जब बम और गोलियां चला रहे थे तब ये नहीं देख रहे थे की सामने वाला हिन्दू उनका परिचित है या मिलने वाला व्यक्ति है| मुसलमान केवल यह सोच कर हमला कर रहे थे की सामने वाला हिन्दू है और इनको जान से मार डालो| देखते ही देखते एक घंटे के अंतराल में नगर की सभी मस्जिदों से हिन्दुओं पर पथराव और बम इत्यादि फेंके जाने लगे| ऐसा लग रहा था की ये हिन्दुओं पर हमला पूर्व नियोजित था और मानो हिन्दुओं पर इस हमले की तैयारी बहुत समय से हो रही थी| ये ठीक वैसे ही था जैसे सुबह ८ बजे गोधरा में २००२ में हजारो लीटर पेट्रोल अचानक से आ गया था जबकि इतने सुबह गुजरात में पेट्रोल पम्प नहीं खुलते हैं| इसके अलावा उन आतताई मुसलमानों का जत्था जहाँ कही से भी निकलता था वहां की हिन्दुओं की चीजों को आग लगाते हुए निकलता था| यह देख नगर के हिन्दू भाई भयभीत हो गए और उन्होंने ने आस पास में ग्रामीण इलाके में रह रहे अपने जानने वालों को फ़ोन पर सुचना दी इन आतंकी मुसलमानों के कृत्य के बारे में की कैसे मुस्लमान विध्वंश और आगजनी कर रहे हैं नगर में| जिसे सुन ग्रामीण इलाके से करीब १०-१५ हजार लोग अपने हाथों में बन्दुक और अन्य हथियार ले कर थोड़ी देर में कोसीकलां पहुँच इन आतंकी मुसलमानों को खदेड़ा|



इस बिच में मुसलमानों ने हिन्दुओं के सैनी मोहल्ले पर हमला बोल दिया| मुसलमानों ने बमबारी से वहां की अनेक महिलाओं को बुरी तरह घायल कर दिया| अनेक मकानों को तहस-नहस कर दिया और उनके घरों को लूटा| अश्लीलता का नंगा नाच वहां भी दिखाया मुसलमानों ने| इसका विरोध करने वाले माली समाज के एक युवक सोनू को गोलियों से छलनी कर दिया इन मुसलमानों ने| सोनू की मौके पर ही ह्रदय विदारक चीखों के साथ मृत्यु हो गई| उन दंगाइयों के जाने के बाद पुलिस भी पर्याप्त बल के साथ वहां पहुँच गई| इसके साथ ही आर०आर०एफ़० और आर०ए०एफ़ की अनेक गाड़ियाँ कोसी में हो रहे दंगे को शांत करने के लिए पहुँच गईं| इस दौरान हमारे ग्रामीण भाइयों ने मुस्लिमो के करीब १ दर्जन दुकानों को आग के हवाले कर दिया| करीब सायं ८ बजे पुलिस ने आकर पुरे नगर में कर्फ्यू लगा दिया| लेकिन कर्फ्यू लगने के बाद भी मुस्लिमो का कहर बंद नहीं हुआ| अर्धरात्रि तक उनके इलाके से गोलियों की आवाजें सुने देती रहीं| 

इसके बाद 1 जून को दंगे वाले रात् को करीब ३ बजे कोसीकलां के मस्जिद से एक ऐलान सुनाई दिया की "सारे मुस्लिम तैयार रहें| अल्लाह तुम्हारे साथ है| ये तो बस एक शुरुवात भर है इंशा अल्लाह इस बार हम सभी मुसलमान मिल कर इन हिन्दुओं का सफाया कर देंगे| यह बड़े शबाब का काम है जो की अल्लाह ने तुमको दिया है| इन काफिरों को मरोगे तो अल्लाह तुम्हे जन्नत बख्सेगा|" यह ऐलान सुन सभी हिन्दू सहम गए और रात भर अपने छतों पर टहलते रहे|



खौफ के साये में रात गुजारने के बाद दुसरे दिन नगर की हालत काफी बिगड़ी हुई दिखाई दे रही थी| हर तरफ मृत्यु का सन्नाटा पसरा हुआ था| चारो तरफ बस आगजनी और तबाही का ही मंजर था| मुस्लिम दंगाइयों ने चुन चुन कर ऐसे गोदामों में आग लगाई थी जो हिन्दुओं की थीं और करोडो का सामान रखा हुआ था उसमे| यदि पिछली शाम को ग्रामीण लोग नहीं आये होते नगरीय लोगो की रक्षा हेतु तो शायद नगरीय क्षेत्र हिन्दू विहीन हो चूका होता| ग्रामीण बंधुओं का नगरिय लोग दिल से आभार प्रकट करते हैं|

मथुरा जिले के एस०पी०, एस०एस०पी०, आइ०जी०, डी०आइ०जी० और डी०एम० ही नहीं बल्कि आगरा और अलीगढ के सभी हेड कांस्टेबल, एस०ओ०, एस०डी०एम०, पी०ए०सी०, आर०ए०एफ़, आर०आर०एफ़० ने पुरे कोसीकलां को अपने कब्जे में ले लिया| दंगे के दौरान ड्यूटी पर तैनात सभी प्रशासनिक अधिकारीयों के तबादले कर दिए गए और जो लोग उनकी जगह पर आये वो आज़म खान (शहरी विकास मंत्री), इमाम बुखारी (शाही इमाम दिल्ली जामा मस्जिद) और मौलाना युसूफ मदानी के खास अधिकारी थे| अब इन गुलाम अधिकारीयों के नेतृत्व में दंगे की जाँच शुरू होने लगी| प्रशासन पर दबाव इस कदर था की ये अधिकारी हिन्दुओं के घरों पर ही छापा मारने लगे| मुसलमानों के मात्र कह भर देने से ही हिन्दुओं की धरपकड़ शुरू हो गई| दंगे वाले दिन चाहे कोई हिन्दू कोसीकलां में हो या ना हो उन्हें आरोपी दिखाया जाने लगा| जिन हिन्दुओं का नुकसान हुआ वो भी पुलिस रिकॉर्ड में दंगाई दिखाए गए| अगले माह होने वाले नगर पालिका चुनाव में खड़े होने वाले सभी हिन्दू प्रत्याशियों को दंगाई दिखा कर उनके खिलाफ एफ़०आइ०आर तैयार कर दिया गया| आस-पास के देहात के सभी हिन्दू ग्राम प्रधानों एवं दबंग हिन्दुओं के खिलाफ भी एफ़०आइ०आर दर्ज की गई|



यह प्रथम दृष्टया ही साजिस लग रही थी प्रशासन और सरकार की हिन्दुओं की ताकतें कमजोर करने की और उनके हाथ काट देने की| नई महिला एस०एस०पी० एम० पदमजा, डी०एम० अलोक तिवारी और आइ०जी० मियां जावेद अख्तर ये तीनो पुलस अधिकारी हिन्दू विरोधी और मुस्लिम हितैषी हैं| हिन्दुओं के प्रति इनका व्यव्हार सौतेला रहा है| अब तक हिन्दुओं में से १४ गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और गिरफ्तारियां आज भी बदस्तूर जारी हैं जो की रात के अँधेरे में 3 बजे तक में की जा रही हैं वो भी जबरन हिन्दू घरों में घुस कर| और अभी तक में २०० हिन्दुओं के खिलाफ एफ़०आइ०आर० दर्ज हो चूका है और इतना ही नहीं करीब २००० अज्ञात हिन्दू भाइयों को दंगाई दिखा उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज किया गया है| और दिखने के लिए आज़म खान (शहरी विकास मंत्री) के आगमन पर २-४ मुस्लिमों को पकड़ कर उनको राजसी ठाट-बाट के साथ जेल में रखा गया है ताकि ज्यादा हो-हल्ला ना हो|

गौरतलब हो की १ जून दंगे वाले दिन जब हिन्दू बंधुओं के घर और दुकाने जलाई जा रही थीं और हिन्दू महिलाओं के साथ अभद्र और नीच हरकते की जा रही थी और मुस्लिम नुकसान पहुचाते हुए आगे बढ़ रहे थे तब हिन्दुओं ने थाने पर खड़े आइ०जी० से मदद की गुहार लगाई की सब जल रहा है और जलते हुए घरों में हमारी महिलाएं हैं लेकिन आ०जी० के कानो को जैसे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था और ना ही उसकी आँखों को कुछ दिखाई दे रहा था| पर जब ग्रामीण हिन्दू भाई अपने नगरीय हिन्दू भाइयों की मदद के लिए आगे बढे तब ग्रामीण हिन्दू भाइयों पर इसी आइ०जी० ने लाठी चार्ज कर उनको तितर बितर करने की कोशिस की| ऐसा ये आइ०जी० इसलिए कर रहा था क्युकी ये खुद भी मुस्लिम है और मुस्लिमों को मौका दे रहा था की तुम्हारे पास मौका है और मैं खड़ा हूँ तुम्हारी रक्षा को जितना नुकसान पहुँचा सकते हो इन हिन्दुओं को उतना नुकसान जल्दी से पहुँचा लो|


दंगे के ४-५ दिन बाद डी०एम० से शांति बहाली के लिए कोसीकलां के व्यापारियों ने गुहार लगाई तो डी०एम० का कहना था कि, "मेरा काम है नगर में शांति व्यवस्था बनाये रखना| यह मेरा काम नहीं है कि आप हिन्दू और मुसलमान आपस में राजीनामा करते हैं ये नहीं| वह आप लोगों का काम है| आप लोग बाजार खोलो या ना खोलो इससे मेरा कोई सरोकार नहीं है| तुम्हारे ऐसा करने से मेरी कोई तनख्वाह नहीं कट रही है| अगर मुझे कोई उपद्रव करते मिल गया तो मैं पहले उसे समझाऊंगा| यदि वो नहीं माना तो उसे डंडों से समझाऊंगा और अगर तब भी नहीं समझा तो उसको मैं गोली से उड़ा दूंगा|"

नगर व्यापारियों ने प्रशासन के इस रवैये से क्षुब्ध हो कर कोसीकलां में बाज़ार ना खोलने का निश्चय किया| १ जून शाम से आज तक बाज़ार नहीं खुला है कोसीकलां में| और सड़कों पर केवल सुरक्षा बल के जवान घूमते हुए दिखाई देते हैं| हम हिन्दुओं के घरों में राशन इत्यादि जमा होता है| पर मुसलमान जाती ऐसी होती है कि वो रोज कमाते हैं और रोज राशन खरीद कर खाते हैं| हिन्दुओं का अनुमान था कि हमारे बाजार ना खोलने से मुसलमानों के हौसले पस्त हो जायेंगे और वो राजीनामा को मजबूर हो जायेंगे| लेकिन हिन्दुओं का अनुमान गलत साबित हुआ| जैसे ही कर्फ्यू में ढील हुई या सोच समझ कर ढील दी गई मुसलमानों ने अपने औरतों और बच्चों को अपने रिश्तेदारों के यहाँ भेज दिया| अब नगर में उग्रवादी, कट्टरवादी और दंगाई किस्म के मुस्लिम रह गए हैं जो कि संख्या में बहुत अधिक हैं| 


दंगा के तीसरे दिन से दिल्ली के जामा मस्जिद कि तरफ से ट्रक भर कर राशन, सब्जियां, फल इत्यादि आने शुरू हो गए और गौर करने वाली बात है कि प्रशासन ने इसके लिए कोई रोक-टोक नहीं कि यहाँ तक कि इन ट्रकों को जांचने का कार्य भी नहीं किया गया| बल्कि इसके इतर प्रशासन ने मुस्लिम बस्तियों में टैंकर भर कर पानी भिजवाना शुरू कर दिया और हिन्दू मोहल्लों में पानी कि सप्प्लाई पर रोक लगा दिया गया| हिन्दुओं में इस बात का काफी रोष व्याप्त हो गया क्यूंकि हिन्दुओं के घरों में पानी कि किल्लत और एक वर्ग विशेष को इतनी सुविधा वो भी प्रशासन के तरफ से|

हिन्दुओं के तरफ से हिन्दुओं और मुसलमानों में सुलह के लिए आज तक ४ कोशिशें कि जा चुकी हैं| लेकिन अफ़सोस कि तीनो बार मुसलमानों ने इन राजीनामे से मना कर दिया| यही नहीं पूरा मेवात क्षेत्र जहाँ करीब १८ लाख मेव-मुस्लिम रहते हैं उन्होंने मुस्लिमो कि हर तरह कि सहायता करने का खुल्ला ऐलान कर दिया| इसमें हरियाणा के नूंह, पुन्हाना आदि मेवात क्षेत्र काफी सक्रिय हैं|

वहीँ चौथे दौर कि संधि प्रयास में कोसीकलां के कांग्रेस समर्थित आर एल डी के सेकुलर विधायक ठाकुर तेजपाल सिंह ने एक बैठक कि जिसका मुख्या मुद्दा था शांति बहाल करना पर इन्होने जो किया वो हिंदुत्व को शर्मसार करने वाला था| ये विधायक महोदय मुसलमानों के इतने अत्याचार के बावजूद हिन्दुओं को ही भाई चारे का पाठ पढ़ा रहे थे| शायद इन विधायक महोदय को अपनी कुर्सी बचाने की ज्यादा चिंता थी| पर कोसीकलां के हमारे हिन्दू भाइयों ने इन्हें टका सा जवाब दे दिया की हमें नहीं चाहिए शांति और हम अब अपने तरीके से निपट लेंगे इन अधर्मी मुसलमानों से आप विधायक महोदय अपने मुस्लमान भाइयों के साथ मस्ती करो|


यह सर्वविदित है कि उत्तर प्रदेश कि सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी सरकार जिसके मुखिया मुलायम सिंह यादव हैं वह हिन्दू विरोधी और मुसलमान परस्त पार्टी है| उसने इस बार उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार बनाने के चक्कर में मुसलमानों को अपने मंत्रिमंडल में बड़े तौर पर तरजीह दी है।

आज़म खान जो कि शहरी विकास मंत्री है वो कट्टरवादी मुस्लिम है, वह कोसीकलां आया और उसने केवल मुसलमानों के हित कि ही बातें करीं| कोसीकलां के मुसलमानों को उसने न्याय दिलाने और प्रशासन से सहायता दिलाने का पूरा भरोसा दिया| आज़म खान ने हिन्दुओं को भी सब कुछ ठीक करने का वादा किया पर उसके चेहरे से साफ़ झलक रहा था कि जो भी वादा आज़म खान कर रहा था हिन्दुओं से वो केवल उपरी मन से था| दरअसल आज़म खान ने पर्दे के पीछे मुसलमानों कि पीठ थपथपाई और उनको अभयदान दिया|

आज़म खान के जाने के बाद उसी रात कोसीकलां के रिहाइशी इलाके आर्यनगर के एक बनिया व्यावसायी के घर और उसके निचे बनी दुकान को किसी मुसलमान ने जला दिया जिस वजह से उस व्यावसायी को लाखों का नुकसान हुआ| सुबह पुलिस आई और जबरदस्ती उस पीड़ित व्यावसायी परिवार से लिखवा कर ले गई कि ये आग शार्ट-सर्किट के चलते लगी थी| इस घटना कि दूसरी रात को फिर किसी मुसलमान ने एक और बनिया व्यावसायी के बाईपास स्थित दोना-पत्तल, मुन्जवान, रस्सी और झाड़ू के गोदाम को आग के हवाले कर दिया| इस बार भी पुलिस सुबह ही आई और पुलिस ने उस व्यापारी पर प्रशासनिक दबाव देकर लिखवा लिया कि ये आग भी शार्ट-सर्किट के चलते लगी है| जबकि सत्यता यह थी कि इस गोदाम में ना तो कोई बिजली के तार कि फिटिंग थी और ना ही कोई बिजली का कनेक्सन था| नगर के हिन्दुओं में रोष चरम पर है पर परेशानी ये है कि अगर विरोध प्रदर्शन किया तो जैसे प्रशासन बराबर धमकी दे रहा है कि हिन्दुओं पर रासुका लगा जेल में डाल दिया जायेगा|

मुस्लिमों के जुल्म कि इन्तेहाँ तब हो गई जब उन्होंने अपने इलाके में कर्फ्यू लगा होने के बावजूद हमारी गौमाता कि हत्या कर कूड़े के ढेर में फेंक दिया| यह एक करारा तमाचा था हम हिन्दुओं के मुँह पर और चेतावनी थी यह मुसलमानों कि तरफ से कि देख लो कितना भी कर्फ्यू हो पर हम तो ऐसा ही करेंगे| और तुम हिन्दू अगर रोक सकते हो तो रोक कर दिखा दो| इस बार भी पुलिस बहुत देर से पहुंची और बिना छानबीन किये कि ये गाय आई कहाँ से और किसने इसे मारा पुलिस ने गाय का पोस्टमार्टम करा गौमाता को धरती में गडवा दिया| और इतना पर ही नहीं रुके पुलिस वाले उन्होंने वहां उपस्थित पत्रकारों को ये धमकी दी कि ये किसी भी न्यूज़ में नहीं छापना चाहिए कि मुसलमानों के इलाके में गाय का शव मिला है|


कोसीकलां में भाजपा के राजनाथ सिंह जी भी आये| उनको कोसीकलां में प्रवेश नहीं दिया गया| भारी मात्र में पुलिस बल आ गया राजनाथ सिंह जी को रोकने के लिए| कोसीकलां के बाईपास पर ही स्थित एक ढाबे पर रुक कर नगर के पीड़ितों का दर्द सुन कर वो भी अपनी राजनैतिक रोटियां सेंकते हुए दिखाई दिए| राजनाथ सिंह जी ने कहा कि, "मैं अखिलेश यादव से बात करूँगा कि वो हिन्दुओं के प्रति इतने रूखे क्यों हैं? यह एक तरफ़ा कार्यवाही क्यों कर रहे हैं वो? पूरी भाजपा आपके साथ है| हम जल्दी ही दिल्ली में हिन्दुओं के ऊपर हो रहे इस अत्याचार के विरोध में धरना प्रदर्शन करेंगे| हम कोसीकलां वासियों कि आवाज ऊपर तक पहुचाएंगे| आप लोग घबराये नहीं|" और भी कई बाते इन्होने बोलीं पर कोसीकलां वाशियों को जो राजनाथ सिंह जी और भाजपा से जो आशा थी वो धूमिल होती प्रतीत हुईं|

१३ जून को मुसलमान बस्तियों से यह सूचना आई कि आज हिन्दुओं कि तेरहवीं तो हमने हिन्दुओं कि गौमाता कि हत्या करके कर दी अब इनको दिखाना है कि इनका चालीसवां कैसा होता है| इन मुट्ठी भर मुसलमानों के इतने उछालने का कारन एक ही है कि हम हिन्दुओं का हाथ इस प्रशासन ने काट दिया है और मुसलमानों ने अपनी ताकत इन तेरह दिनों में अच्छे से बढ़ा लिया| क्यूंकि जिन ट्रको में उनके लिए दिल्ली के जामा मस्जिद से खाने पिने का सामान आ रहा है और यहाँ का प्रशासन बिना किसी रोकटोक के उसे मुस्लिम क्षेत्र तक जाने दे रहा है उन ट्रकों में खाने-पिने के सामानों में छुपा कर घटक और स्वचालित हथियार भेजे जा रहे हैं| (ज्ञात हो कि इमाम बनाने के समय और उसके पहले से दिल्ली जामा मस्जिद के मौजूदा इमाम बुखारी बोलते आये हैं कि मुसलमानों कि एक सशत्र सेना बनाने कि और यहाँ तक कि बुखारी ने मुस्लिम लीग के तौर पर अपनी एक मुस्लिम पार्टी बनाने के लिए साल २००० में कश्मीर के अलगाववादी नेता गिलानी से भी मुलाकात करी थी)| और इन खाना पीना लादे ट्रकों का प्रवेश आजभी बदस्तूर जारी है कोसीकलां के मुस्लिम बहुल इलाके में| अब इतने ही दिनों में मुसलमान हिन्दुवों ओ खुली चेतावनी दे रहा है कि अब चाहे पूरा देहात आ जाये हम हिन्दुओं का मुकाबला कम से कम पुरे दो महीने तक मुकाबला कर सकते हैं| आखिर २ महीने तक लगातार हिन्दुओं से मुकाबला करने कि बात ये मुसलमान अचानक से कैसे करने लगे| १६ जून को पूर्व निश्चित समझौता सभा में मुसलमान नहीं आये| उनका कहना था कि बाज़ार खोलना हिन्दुओं कि मज़बूरी है उनकी नहीं| हमको तो खाना अल्लाह अपने घर मस्जिदों से दे रहा है| तुम हिन्दुओं कि गर्ज है तभी तो हम मुस्लिमों से राजीनामा करना चाहते हो| बाज़ार ना खोलने से हिन्दू बेहाल होगा ना कि मुसलमान क्यूँकी मुसलमानों के घर खाने पिने कि सामानों से भरा हुआ है|


विदित हो कि गत दो माह पूर्व विधानसभा चुनाव होने के बाद कोसीकलां में मुसलमानों कि बस्ती निकासे में तत्कालीन डी०एम० ने स्वयं उपस्थित रह कर और मुस्लिम बस्ती में शिविर लगा कर पुरे २०० पितौलों के लाइसेंस मुस्लिमों को हाँथो-हाँथ आबंटित किये गए| जबकि कानून किसी भी शास्त्र का लाइसेंस बनवाने कि प्रक्रिया में करीब ३ माह से भी अधिक का समय लग जाता है| लेकिन इन मुसलमानों के लिए यह कार्य एक दिन में ही कर दिया गया| और ये कार्य तो एक जगह किया गया जो हमें पता चला हो सकता है ऐसा कार्य उत्तर प्रदेश के हर मुस्लिम इलाके में चोरी छिपे किया गया हो और इसके बारे में किसी को पता ना चला हो| वैसे कोसीकलां के हिन्दुओं ने भी अपनी सुरक्षा हेतु शास्त्रों के लाइसेंस आवंटित किये जाने कि मांग कि जिसे प्रशासन ने ठन्डे बसते या कहें तो कूड़े दान में डाल दिया| शतप्रतिशत मुसलमानों पर इस मेहरबानी के पीछे केवल राजनैतिक समीकरण है|

दिनांक १६ जून से कोसीकलां नगर से सभी लाइसेंस बन्दुकधारि हिन्दुओं से पुलिस उनके हथियार थाने में जमा करने में जीजान से जुट गई है| पर वहीँ दूसरी तरफ मुसलमानों से उनके वैध या अवैध हथियारों को पुलिस जब्त नहीं कर रही है| प्रशासन के इस एक तरफ़ा रवैये को लेकर हिन्दुओं में एक खौफ के साथ-साथ गहरी साजिस का भी अंदेशा हो रहा है जिस कारन हिन्दू बंधुओं में रोष व्याप्त है|


आज मुसलमान हम हिन्दुओं के सर पर नाच रहे हैं| हम हिन्दू यहाँ अपने ही श्री कृष्ण कि नगरी में ऐसे रह रहे हैं जैसे दांतों के बिच हमारी जिह्वा| हमारे इस हँसते खेलते वातावरण और घरौंदों को इन मुसलमानों ने ऐसा बना दिया है जैसे कि हम किसी खंडहर में रह रहे हों| अपने ही नगर और मोहल्ले में हमें ऐसे कैद किया गया है जैसे कि हम जेल में रह रहे हों| सरकार और प्रशासन दोनों ही हम हिन्दुओं के खिलाफ ही कार्यवाही करने को व्याकुल और अति-आतुर हैं| सरकारी और प्रशासनिक दबाव के चलते कोसीकलां के इस भीषण महासंग्राम और खुलेआम जलते घरौंदों को किसी भी टी०वि० चैनल पर नहीं दिखाया जा रहा है और ना ही किसी समाचार पत्र में इसको कोई स्थान मिल रहा है| यही नहीं किसी भी हिंदूवादी नेता को नगर में प्रवेश करने से रोका जा रहा है और उनको प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है| वैसे तो हिन्दू-मुस्लिम के दंगे आये समय में होते रहे हैं उत्तर प्रदेश में, जैसे १९८० में हुवा मोरादाबाद का दंगा जिसने करीब २००० लोगों कि प्राणों कि आहुति ले लिया था और उसमे भी कुछ नहीं किया गया था क्युकी तब केंद्र और प्रदेश में कांग्रेस कि सरकार थी| पर कोसीकलां में १ जून से चल रहे इस दंगे ने गुजरात (गोधरा-२००२) में हुए दंगे कि याद दिला दिया कि १० सालों बाद आज भी मीडिया और मोदी जी के विरोधी कैसे उस दंगे को आये दिन उछालने कि कोशिस करते हैं पर वहीँ भारत देश के बाकि के दुसरे भागों में हुए दंगो जिसमे भी गुजरात के तर्ज पर ही मुसलमानों ने ही शुरुवात किया उसे बड़े जतन से छिपाया जा रहा है ताकि किसी को सच्चाई का पता ना चले| इसे कहते हैं हिन्दू विरोधी और मुस्लिम परस्ती| 


आज मुसलमान हम हिन्दुओं के सर पर नाच रहे हैं| हम हिन्दू यहाँ अपने ही श्री कृष्ण कि नगरी में ऐसे रह रहे हैं जैसे दांतों के बिच हमारी जिह्वा| हमारे इस हँसते खेलते वातावरण और घरौंदों को इन मुसलमानों ने ऐसा बना दिया है जैसे कि हम किसी खंडहर में रह रहे हों| अपने ही नगर और मोहल्ले में हमें ऐसे कैद किया गया है जैसे कि हम जेल में रह रहे हों| सरकार और प्रशासन दोनों ही हम हिन्दुओं के खिलाफ ही कार्यवाही करने को व्याकुल और अति-आतुर हैं| सरकारी और प्रशासनिक दबाव के चलते कोसीकलां के इस भीषण महासंग्राम और खुलेआम जलते घरौंदों को किसी भी टी०वि० चैनल पर नहीं दिखाया जा रहा है और ना ही किसी समाचार पत्र में इसको कोई स्थान मिल रहा है| यही नहीं किसी भी हिंदूवादी नेता को नगर में प्रवेश करने से रोका जा रहा है और उनको प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है| वैसे तो हिन्दू-मुस्लिम के दंगे आये समय में होते रहे हैं उत्तर प्रदेश में, जैसे १९८० में हुवा मोरादाबाद का दंगा जिसने करीब २००० लोगों कि प्राणों कि आहुति ले लिया था और उसमे भी कुछ नहीं किया गया था क्युकी तब केंद्र और प्रदेश में कांग्रेस कि सरकार थी| पर कोसीकलां में १ जून से चल रहे इस दंगे ने गुजरात (गोधरा-२००२) में हुए दंगे कि याद दिला दिया कि १० सालों बाद आज भी मीडिया और मोदी जी के विरोधी कैसे उस दंगे को आये दिन उछालने कि कोशिस करते हैं पर वहीँ भारत देश के बाकि के दुसरे भागों में हुए दंगो जो गुजरात के तर्ज पर ही मुसलमानों ने ही शुरुवात किये उसे बड़े जतन से छिपाया जाता है ताकि किसी को सच्चाई का पता ना चले| जैसे हाल ही में हुहे रामनवमी के बाद हेदराबाद के मंदिरों में गाए और हरा रंग फेके जाने के महा अपराधों को छुपाया गया. हेदराबाद के ही मंज्लिश पार्टी के लीडर अकबरुदीन ओबीसी द्वारा दिया गया फतवा चारमिनार स्थित महालक्ष्मी मंदिर में घंटिया बजवाने पर प्रतिबंद जैसे फतवे.

 हिन्दू भाइयों अभी भी समय है जाग जाओ और निश्चय करो कि आप क्या चाहते हैं? केवल खुद कि शांति या सम्पूर्ण शांति जिसमे आप के बच्चे दंगों का दंश ना झेले| 

मुस्लिम परस्त मुलायम सिंह यादव या कांग्रेस्सियों जैसे नेता जो हमेसा मुस्लिम परस्ती ही दिखाते रहते हैं को चुनना चाहते हैं आप या किसी ऐसे राष्ट्रभक्त प्रधानमंत्री को बनते हुए देखना चाहेंगे कि जो देश कि सोचे?

मोदी जी ने तो दंगों कि जिम्मेदारी भी ली थी पर यहाँ तो चाहे वो उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री अखिलेश यादव हों या मुलायम सिंह यादव या आज़म खान इन लोगों ने जिम्मेदारी लेना तो दूर विपक्ष के हाई कोर्ट के द्वारा गठित SIT से जाँच कि मांग को भी ठुकरा दिया क्यूँकी इनकी सारी मुस्लिम परस्ती खुल कर सभी के सामने आ जाती और इनकी दुकान बंद हो जाती|



निर्णय अब आप सभी हिन्दू भाइयों के हाथों में हैं कि आप क्या चाहते हैं?

साभार--विनीत कुमार सिंह http://ekaambhartiya.blogspot.in/2012/06/blog-post_18.html?showComment=1340012522028#c6492976508026163217

'राष्ट्र सर्वप्रथम सर्वोपरि' वन्दे मातरम्... जय हिंद... जय भारत..


चित्र ... जोकी दैनिक जागरण के मुख्य पृष्ठ पर २ जून को मथुरा संस्करण मैं प्रकाशित कोसी में हुयी सांप्रदायिक घटना पर प्रकाशित समाचार कोसी कलां मथुरा में शुक्रवार को दोपहर 2 बजे मामूली पानी को लेकर विवाद ने दंगे का रूप ले लिया l 


घटना सराय शाही में हिन्दुओं द्वारा निर्जला एकादशी के अवसर पर लगायी गयी पानी की प्याऊ जहाँ एक मुस्लिम द्वारा साथ रखी पानी की टंकी में जान बूझ कर गंदे हाथ धो लिए गए जिसके बाद वहां उपस्थित हिन्दुओं द्वारा उसकी पिटाई कर दी गयी, चूँकि घटना करीब 2 बजे की थी और शुक्रवार का दिन था तो पास ही मस्जिद से काफी संख्या में मुस्लिम नमाज अदायगी के बाद आ रहे थे इसपर वहां आक्रोशित भीड़ ने पथराव मारपीट, आगजनी, लूटपाट आदि करना प्रारंभ कर दिया l 


दैनिक जागरण के 2 पृष्ठ पर प्रकाशित घटना जिसमें कई करोड़ का सम्मान का नुक्सान हो गया दूकान, मकान, गोदाम, आदि को आग के हवाले कर दिया गया तथा कई जगह लूटपाट भी हुयी l 

दैनिक जागरण २ जून के पृष्ठ संख्या 16 पर प्रकाशित मुख्य पृष्ठ का शेष समाचार जिसमें बैंक को लूटने का प्रयास भी किया गया किन्तु सफल ना होने पर मुसलमानों द्वारा बाहर खड़े वाहनो में आग लगा दी गयी तथा जीवन बीमा अधिकारी के परिवार के घर में आग लगा दी गयी l परिवार को बचा लिया गया तथा इसी बीच एक हिन्दू तीर्थयात्री भी मारा गया तथा साथ 7 जून को मुख्य प्रकाशित समाचार, जिसमें हिन्दूओं के खिलाफ एकतरफा नीयत से मुक़दमे दर्ज हुए l

काजू भुने पलेट मेंविस्की गिलास में उतरा है समाजवाद विधायक निवास में 

पक्के समाजवादी हैंतस्कर हों या डकैत इतना असर है ख़ादी के उजले लिबास में 

आजादी का वो जश्न मनायें तो किस तरह जो आ गए फुटपाथ पर घर की तलाश में

पैसे से आप चाहें तो सरकार गिरा दें संसद बदल गयी है यहाँ की नख़ास में

जनता के पास एक ही चारा है बगावत यह बात कह रहा हूँ मैं होशो-हवास में 

 जब तक हम गांधीवादी , बाबावादी , सेक्यूलरवादी बने रहेगे , तब तक ऐसा ही होता रहेगा । हिन्दू भाईयों यदि अपना अस्तित्व बचाना है तो व्यक्तिवादी न बनकर हिन्दूवादी बनों और दुष्टों का प्रतिकार करना शुरू कर दों , अन्यथा तुम्हें तुम्हारे देश में ही भयंकर यातनाऐ भोगनी पडेगी और तुम्हारी बहन - बेटियां जेहादी मुल्लों की रखैल बनकर रहेगी ।

अगर हिन्दू एक होते तब ये ही दिन दखने को मिलता अभी तक न जाने कितने मुल्लो को सबक सिखा दिया होता अभी तब पता चलेगा जब कोसीकलां में हिन्दुओ की बहन बेटी घर से निकाल कर ले जाई जायंगी तब भी चुप रहना अगर असल हो तब कुछ दिन और बाजार बंद रखते जब तक मुल्लो को सजा न मिलती 

धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः । तस्माद्धर्मो न हन्तव्यः मानो धर्मो हतोवाधीत् ॥" हमारे धर्म ग्रंथो में यह बात स्पष्ट है कि जो धर्म की रक्षा करता है धर्म उसकी रक्षा करता है | हिंदू समाज के पतन का कारण यह भी है कि वह अपने धर्म ग्रंथोके दिव्य उपदेशों को विस्मृत करके केवल और केवल मोहन दास गाजी की अंधभक्ति करता जा रहा है, नाथूराम गोडसे जी ने सही ही कहा था कि अहिंसा की अवधारणा एक दिन हिंदू समाज को इतना कमजोर कर देगी कि वह अपनी रक्षा करने में भी सक्षम नहीं रहेगा | समाजवादी पार्टी को सत्ता में लाने वालों में हिन्दुओ का ही अधिक योगदान है और ऐसा करके वो अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारते आए हैं और मार रहे हैं और निसंदेह आगे भी मारेंगे ही |  जब अपना खुद का ही सिक्का खोता हो तो परायों से तो उम्मीद ही क्या की जा सकती है ?

हिंदुत्व के कारण भारतवर्ष अखन्ड हैभारतवर्ष की अखंडता खतरे में पड़ी है तो सिर्फ इस बात के कारण क्यूंकि हिंदुत्व कमजोर हुआ है टुकड़े इस बात से नहीं होंगे कि भारत हिंदू राष्�¤