शुल्बसूत्रों (Śulbasūtras) में बौधायन का शुल्बसूत्र सबसे प्राचीन माना जाता है। इन शुल्बसूत्रों का रचना समय १२०० से ८०० ईसा (1200 - 800 BCE) पूर्व माना गया है।
अपने एक सूत्र में बौधायन ने विकर्ण के वर्ग का नियम दिया है-
दीर्घचातुरास्रास्याक्ष्नाय ा रज्जुः पार्च्च्वमानी तिर्यङ्मानीच
यत्पद्ययग्भूते कुरुतस्तदुभयं करोति ।
एक आयत का विकर्ण उतना ही क्षेत्र इकट्ठा बनाता है जितने कि उसकी लम्बाई और चौड़ाई अलग-अलग बनाती हैं। यही है पाइथागोरस का प्रमेय (Pythagoras theorem)। स्पष्ट है कि इस प्रमेय की जानकारी भारतीय गणितज्ञों को पाइथागोरस के पहले से थी। दरअसल इस प्रमेय को बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय कहा जाना चाहिए।
शोक की बात है, जिस देश में लोग रोजमर्रा के जरूरतों के लिए लड़ रहें हैं, कौन लड़ेगा वैदिक सत्य के अस्तित्व के लिए ? जितना हो सके इस सत्य का प्रचार करें |
अपने एक सूत्र में बौधायन ने विकर्ण के वर्ग का नियम दिया है-
दीर्घचातुरास्रास्याक्ष्नाय
यत्पद्ययग्भूते कुरुतस्तदुभयं करोति ।
एक आयत का विकर्ण उतना ही क्षेत्र इकट्ठा बनाता है जितने कि उसकी लम्बाई और चौड़ाई अलग-अलग बनाती हैं। यही है पाइथागोरस का प्रमेय (Pythagoras theorem)। स्पष्ट है कि इस प्रमेय की जानकारी भारतीय गणितज्ञों को पाइथागोरस के पहले से थी। दरअसल इस प्रमेय को बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय कहा जाना चाहिए।
शोक की बात है, जिस देश में लोग रोजमर्रा के जरूरतों के लिए लड़ रहें हैं, कौन लड़ेगा वैदिक सत्य के अस्तित्व के लिए ? जितना हो सके इस सत्य का प्रचार करें |

No comments:
Post a Comment