शस्त्र एक ऐसा तत्त्व है , जो किसी भी बिकट
परिस्थिति में मनुष्यजाति को तारने की क्षमता रखता है , और जिसे उठाना (समय
की मांग को देखते हुए) हर किसी का उत्तरदायित्व !
अहिंसा के अतिरेकियो ने किस तरह हिन्दू समाज को भ्रमित कर ,नपुंसक संस्कारों के प्रभाव में निष्क्रिय पीढियों को जन्म दिया,किस तरह तथाकथित विद्वान हिन्दू अपने ही हिन्दू धर्म के तत्वों को विरोध करके उसे " धर्म-निरपेक्षता (सेकुलारिसम )" नाम देने लगा , ये हर कोई जानता है।
हिन्दुपुत्रो और हिन्दुपुत्रियो धर्म जागरण हेतु आगे आओ और आवश्यकता होने पर शस्त्र भी उठाओ!
माँ भवानी तुम्हारी रक्षा करेगी और तुम्हारे विजय का कारण बनेगी !
जो हिंदू हित कि बात करेगा वाही देश पर राज करेगा! जो हमारे राम का नहीं वो हमारे काम का नहीं! जो हमारी गौ माता का सगा नहीं वो हमारे लिए बेकार है
आओ साथ मिलाकर इस जातिपाती के बंधन को तोड़ दे मैँसिर्फ हिन्दू हूँ ... न मैँ दलित हूँन मैँ सवर्ण हूँ न मैँ काला हूँ न गौरवर्ण हूँ न तो यादव हूँ और न ही जाट हूँ ... न ही अमीर का पलंग और न ही गरीब की खाटहूँ ... मैँ ना तो लोधी ना ठाकुर नतो पंडित ना ही स्वर्णकार मैँ तो हिन्दूस्थानी हूँ जिसकी महिमा अपरम्पार.... आओँ जाति वर्ण काभेद मिटा देँ हर सनातनी को गले लगा लेँ इस राजनीति से अपने राष्ट्र धर्म को बचा लेँ हमक्या हैँ एक बार फिर दुनिया कोदिखा देँ मैँ ही सिख हू मैँ हीहिन्दू हूँ मेरा धर्म है शुद्धसनातन मैँ ही जैन हूँ मैँ हीबोद्ध हूँ मैँ ही विश्वगुरु भारतका के केन्द्र बिन्दू हूँ मैँ हिन्दू हूँ.....जय हिन्दूराष्ट्र......जय श्री राम कृष्ण परशुराम ॐ
हिन्दू धर्म में जनम लिए हुवे किसी भी व्यक्ति से अगर ये पूछा जाए की उसके लिए...**देश बड़ा या धर्म** अगर जिनका भी उत्तर भ्रस्टाचार या अन्य कुरीतियों के कारन **देश** है तो उनसे मैं केवल एक ही प्रश्न पूछना चाहूँगा की.....आज पाकिस्तान भी है बंगलादेश भी है नेपाल भी है.....जो की कभी भारत का ही हिस्सा थे...यानी की जमीन आज भी वही, हवा भी वही, पर्वत नदिया भी वही.....यहाँ तक की वो सारी कुरीतिया भारत से अलग होने पे भी एक बड़े पैमाने पे आज भी वहां मौजूद है.......तो फिर अलग क्या हुवा है??? फिर क्यों हमारे देश के तीन टुकड़े होने का रोना आज भी हम लोग रोते है ???... एक ही तो फर्क हुवा है की आज वहां हिन्दू की जगह मुस्लिम निवास करते है....और बंगलादेश, पाकिस्तान में गलती से बचे खुचे हिन्दुओं पे अत्याचार कहीं किसी से छुपे नहीं ...ऐसा क्यों??? क्यों आज उनको भी अपना ही देश नहीं मानते हो???..... सच बताओ क्या फर्क केवल नाम का है?????.............. किसी भी देश का अस्तित्वा उस देश के प्राचीन धर्म से ही होता है ...ठीक उसी तरह ,जैसे की हम सबके घर के दरवाजे पे लगी नेम प्लेट में लिखा हुवा हमारे पिता या दादा जी का नाम ...जरा सोचो अगर उस नाम की जगह किसी मुस्लिम नाम की नेम प्लेट लगा दी जाये.....तो क्या फर्क पड़ेगा देश को धर्म से ऊपर रखने वालों पे???.....क्योंकि घर की दीवारे भी वही , फर्नीचर भी वही , पेंट भी वही और साजो सामान भी वही.....सांस ले पाओगे उस मुस्लिम मालिक के नाम के अंतर्गत आने वाले सारे कानूनों की हवा में????.....खुद से नज़रे मिला पाओगे अपनी नन्ही गुडिया सी बहन/बेटी की खिलखिलाती हंसी को काले बुर्के में लपेट के????......क्या तुम्हारा जमीर नहीं धिक्कारेगा तुमको हमारी भारत माता को अपशब्दों से सजाने वालों को अपना दाता बनाने में????.....अपनी सगी माँ को केवल एक औरत की नज़र से देखने वाली कौम की नज़रों को सहन कर पाओगे????....आये दिन पूजी जाने वाली अपनी गौ माता को भी मांसाहार मान कर खाना भी शुरू कर दोगे क्या????......राम , लक्ष्मण , भरत , शत्रुघ्न जैसे पात्र मुहम्मद में कैसे स्वीकार कर सकते हो????....स्रष्टि रक्षा हेतु हलाहल विष को ग्रहण करने वाले भोलेनाथ का ये स्वरुप इस्लाम के कौन से नबी में देखना शुरू कर दोगे????.....इतना सब होने के बाद भी तुम्हारे द्वारा धर्म को ताक पे रखने के इस त्याग से क्या तुम्हारे देश /घर की सारी कुरीतिया और भ्रष्टाचार समाप्त हो जाएँगी, जैसे पाकिस्तान और बंगलादेश की समाप्त हुयी है ????....धर्म को ताक पे रखने के कारन तुम्हारा ही अस्तित्वा सामप्त होने के बाद भी क्या तुम्हारा घर या देश तुम्हारा रह जायेगा.......अगर हाँ........तो कौन सा घर और कौन सा देश ???????...मुझे समझाओ..............
अहिंसा के अतिरेकियो ने किस तरह हिन्दू समाज को भ्रमित कर ,नपुंसक संस्कारों के प्रभाव में निष्क्रिय पीढियों को जन्म दिया,किस तरह तथाकथित विद्वान हिन्दू अपने ही हिन्दू धर्म के तत्वों को विरोध करके उसे " धर्म-निरपेक्षता (सेकुलारिसम )" नाम देने लगा , ये हर कोई जानता है।
हिन्दुपुत्रो और हिन्दुपुत्रियो धर्म जागरण हेतु आगे आओ और आवश्यकता होने पर शस्त्र भी उठाओ!
माँ भवानी तुम्हारी रक्षा करेगी और तुम्हारे विजय का कारण बनेगी !
जो हिंदू हित कि बात करेगा वाही देश पर राज करेगा! जो हमारे राम का नहीं वो हमारे काम का नहीं! जो हमारी गौ माता का सगा नहीं वो हमारे लिए बेकार है
आओ साथ मिलाकर इस जातिपाती के बंधन को तोड़ दे मैँसिर्फ हिन्दू हूँ ... न मैँ दलित हूँन मैँ सवर्ण हूँ न मैँ काला हूँ न गौरवर्ण हूँ न तो यादव हूँ और न ही जाट हूँ ... न ही अमीर का पलंग और न ही गरीब की खाटहूँ ... मैँ ना तो लोधी ना ठाकुर नतो पंडित ना ही स्वर्णकार मैँ तो हिन्दूस्थानी हूँ जिसकी महिमा अपरम्पार.... आओँ जाति वर्ण काभेद मिटा देँ हर सनातनी को गले लगा लेँ इस राजनीति से अपने राष्ट्र धर्म को बचा लेँ हमक्या हैँ एक बार फिर दुनिया कोदिखा देँ मैँ ही सिख हू मैँ हीहिन्दू हूँ मेरा धर्म है शुद्धसनातन मैँ ही जैन हूँ मैँ हीबोद्ध हूँ मैँ ही विश्वगुरु भारतका के केन्द्र बिन्दू हूँ मैँ हिन्दू हूँ.....जय हिन्दूराष्ट्र......जय श्री राम कृष्ण परशुराम ॐ
हिन्दू धर्म में जनम लिए हुवे किसी भी व्यक्ति से अगर ये पूछा जाए की उसके लिए...**देश बड़ा या धर्म** अगर जिनका भी उत्तर भ्रस्टाचार या अन्य कुरीतियों के कारन **देश** है तो उनसे मैं केवल एक ही प्रश्न पूछना चाहूँगा की.....आज पाकिस्तान भी है बंगलादेश भी है नेपाल भी है.....जो की कभी भारत का ही हिस्सा थे...यानी की जमीन आज भी वही, हवा भी वही, पर्वत नदिया भी वही.....यहाँ तक की वो सारी कुरीतिया भारत से अलग होने पे भी एक बड़े पैमाने पे आज भी वहां मौजूद है.......तो फिर अलग क्या हुवा है??? फिर क्यों हमारे देश के तीन टुकड़े होने का रोना आज भी हम लोग रोते है ???... एक ही तो फर्क हुवा है की आज वहां हिन्दू की जगह मुस्लिम निवास करते है....और बंगलादेश, पाकिस्तान में गलती से बचे खुचे हिन्दुओं पे अत्याचार कहीं किसी से छुपे नहीं ...ऐसा क्यों??? क्यों आज उनको भी अपना ही देश नहीं मानते हो???..... सच बताओ क्या फर्क केवल नाम का है?????.............. किसी भी देश का अस्तित्वा उस देश के प्राचीन धर्म से ही होता है ...ठीक उसी तरह ,जैसे की हम सबके घर के दरवाजे पे लगी नेम प्लेट में लिखा हुवा हमारे पिता या दादा जी का नाम ...जरा सोचो अगर उस नाम की जगह किसी मुस्लिम नाम की नेम प्लेट लगा दी जाये.....तो क्या फर्क पड़ेगा देश को धर्म से ऊपर रखने वालों पे???.....क्योंकि घर की दीवारे भी वही , फर्नीचर भी वही , पेंट भी वही और साजो सामान भी वही.....सांस ले पाओगे उस मुस्लिम मालिक के नाम के अंतर्गत आने वाले सारे कानूनों की हवा में????.....खुद से नज़रे मिला पाओगे अपनी नन्ही गुडिया सी बहन/बेटी की खिलखिलाती हंसी को काले बुर्के में लपेट के????......क्या तुम्हारा जमीर नहीं धिक्कारेगा तुमको हमारी भारत माता को अपशब्दों से सजाने वालों को अपना दाता बनाने में????.....अपनी सगी माँ को केवल एक औरत की नज़र से देखने वाली कौम की नज़रों को सहन कर पाओगे????....आये दिन पूजी जाने वाली अपनी गौ माता को भी मांसाहार मान कर खाना भी शुरू कर दोगे क्या????......राम , लक्ष्मण , भरत , शत्रुघ्न जैसे पात्र मुहम्मद में कैसे स्वीकार कर सकते हो????....स्रष्टि रक्षा हेतु हलाहल विष को ग्रहण करने वाले भोलेनाथ का ये स्वरुप इस्लाम के कौन से नबी में देखना शुरू कर दोगे????.....इतना सब होने के बाद भी तुम्हारे द्वारा धर्म को ताक पे रखने के इस त्याग से क्या तुम्हारे देश /घर की सारी कुरीतिया और भ्रष्टाचार समाप्त हो जाएँगी, जैसे पाकिस्तान और बंगलादेश की समाप्त हुयी है ????....धर्म को ताक पे रखने के कारन तुम्हारा ही अस्तित्वा सामप्त होने के बाद भी क्या तुम्हारा घर या देश तुम्हारा रह जायेगा.......अगर हाँ........तो कौन सा घर और कौन सा देश ???????...मुझे समझाओ..............
जय हिन्दू राष्ट्र
जय श्री राम कृष्ण परशुराम ॐ

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