Tuesday, 22 January 2013

वीर सावरकार और सुभाषचंद्र बोस.


26 जून 1940 सुभाष चन्द्र बोस सावरकर सदन पहुंचे,
वहां वीर सावरकर से उनकी मुलाकात हुई
सावरकर ने बोस को रायबिहारी बोस के साथ हुए पत्रव्यवहार के बारे में बताया की उन्होंने 1,50000 युद्धबंदी भारतीयों को एकत्रित करके एक सेना बनाई है,
ठीक छ महीने बाद 19 जनवरी 1941 को बोस अचानक गुपचुप तरीके से जर्मनी पहुँच जाते है और रायबिहारी बोस द्वारा नियंत्रित भारतीय सेना को अपने नेतृत्व में ले लेते है,
1940 में हिन्दू महासभा के 26वे अधिवेशन में सावरकर हिन्दुओ को ब्रिटिश सेना में भर्ती होने का आग्रह करते है, उनके कहने पर हिन्दू महासभा के कार्यकर्ता सभी स्कुल, कालेजो, मंदिरों और गुरुद्वारों में पहुंचकर सुभाष जी के लिए चंदा इकठ्ठा करते है और साथ ही लोगो से अपने अपने बच्चो को सेना में भर्ती होने का आग्रह करते है,
सावरकर की दूरदृष्टि से अनभिज्ञ कांग्रेस, कम्युनिस्ट और अन्य राष्ट्रद्रोही संगठन सावरकर पर अंग्रेजो से मिले होए का आरोप लगाते है,

सितम्बर 1941 में फ्री इंडिया रेडिओ से बोलते हुए सुभाश चन्द्र बोस देश को संबोधित करते हुए कहते है की जब कांग्रेस और अन्य दल ब्रिटिश सेना में भर्ती हुए सैनिको को भाड़े के टट्टू कह कर संबोधित कर रहे थे तो ये देख कर बड़ी ख़ुशी हुई की सावरकर बड़ी ही निर्भीकता के साथ देश के युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए कह रहे है, ये सावरकर के ही पुन्य का प्रताप है जो हमे आज उनके द्वारा आग्रह करके ब्रिटिश सेना में भर्ती किये गये सेनानी प्रशिक्षित सैनिको के रूप में मिल रहे है

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