Tuesday, 22 January 2013

नेताजी के रहस्य आज भी कायम.


कोलकाता, 23 जनवरी- नेताजी को लेकर तरह-तरह की अटकलें हैं. 17 जनवरी 1941 को नेताजी देश छोड़ कर चले गये. उसके बाद क्या हुआ, यह कोई नहीं जानता है. इतिहासविद् डॉ पुरबी राय का कहना है कि 1945 में नेताजी रूस में ही मौजूद थे. जवाहर लाल नेहरु ने स्टालिन से संपर्क कर नेताजी के बारे में जानकारी ली थी. वे रूस जाना चाहते थे, लेकिन वहां की सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी. स्टालिन की मौत के बाद ख्रुश्चेव रूस के राष्ट्रपति बने. 1955 में वह कोलकाता के दौरे पर आये थे.सोवियत संघ के पतन के बाद भारत के कुछ विशेषज्ञों ने रूस का दौरा कर यह पता लगाने की कोशिश की थी कि क्या नेताजी सुभाष चंद्र बोस साइबेरिया के किसी जेल में 1945 के बाद भी रखे गये थे.

यह विशेषज्ञ दल ऐशयाटिक सोसायटी की ओर से भेजा गया था. दल के सदस्यों में से एक ने साइबेरिया के जेल में सजा काट चुके कुछ ऐसे लोगों से भी मुलाकात की, जिनके साथ एक भारतीय कैदी सजा काट रहा था और संभवतरू वही नेताजी थे. इस अपुष्ट सूचना के आधार पर विशेषज्ञों ने भारत सरकार से इस संबंध में रूस सरकार से दस्तावेज मंगाने की दरख्वास्त की थी, परंतु ऐसा नहीं हो सका.
टीम के सदस्यों में ही शामिल एक अन्य विशेषज्ञ डॉ पुरबी राय का मानना है कि इंडियन नेशनल आर्मी को दुनिया के सबसे सुसंगठित सैन्य टुकड़ी के रूप में तैयार करने के कारण नेताजी सुभष चंद्र बोस भारत के कई पड़ोसी राष्ट्रों की नजर में भी खटक रहे थे और शायद इसी कारण उन्हें गुमनामी झेलनी पड़ी. यही वजह है कि आजादी के छह दशक बीत जाने के बाद भी नेताजी सुभाषचंद्र बोस की मौत को लेकर रहस्य बरकरार है.

1956 में नेहरु ने शहनवाज कमेटी की रिपोर्ट पेश की थी. रिपोर्ट में यह कहा गया कि तायकुहू विमान हादसे में नेताजी की मौत हो गयी है. 18 अगस्त 1945 को नेताजी की मौत हुई, यह बताया गया. श्रीमती राय ने कहा कि यह रिपोर्ट सही नहीं है. उनका कहना है कि सरकार सच्चाई लोगों के सामने नहीं ला रही है. इस बारे में नेताजी का भतीजा सुब्रत बोस ने बताया कि जब वे सांसद थे, तो उन्होंने भी केंद्र सरकार से सच्चाई का पता लगाने की मांग की थी. लोग अब भी जानना चाहते हैं कि नेताजी का आखिर हुआ क्या. लोगों को अब तक इस बारे में पुख्ता जानकारी नहीं है. उनका कहना है कि महात्मा गांधी से ज्यादा लोग नेताजी को पसंद करते थे. 1939 में तीन मई को नेताजी ने फॉरवर्ड ब्लॉक नामक राजनीतिक पार्टी की स्थापना की. नेताजी ने कहा था कि वामपंथी यदि एकबद्ध नहीं होंगे, तो दक्षिण पंथियों के खिलाफ वे लड़ाई नहीं लड़ सकते हैं. जब देश से बाहर नेताजी गये, तो उन्होंने अपने बड़े भाई शरतचंद्र बोस को इसकी जानकारी दी थी. इस बात को एकमात्र उनके बड़े भाई ही जानते थे. नेताजी ने अपनी मां प्रभावती देवी को भी इस बात की जानकारी नहीं दी थी. इससे अधिक नेताजी ने कुछ नहीं बताया था.

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